पवित्र परिवार धर्मसंघ की संस्थापिका, परिवारों की प्रेरित · पर्व: 8 जून

📖 मत्ती 25:40
थ्रेसिया का जन्म 26 अप्रैल 1876 को त्रिशूर ज़िले के पुथेनचिरा में हुआ। उनका परिवार कभी धनी था पर गरीब हो गया। युवती के रूप में उन्होंने स्वयं को प्रार्थना और तपस्या में दिया और कुछ साथियों के साथ घरों में जाने, रोगियों की देखभाल करने, संक्रामक रोगियों की सेवा करने जिनसे दूसरे बचते थे, और संकट में पड़े परिवारों की सहायता करने लगीं।
उन्होंने गहरे रहस्यमय अनुग्रह और लंबे आध्यात्मिक संघर्ष के समय भी अनुभव किए। उनके आध्यात्मिक निर्देशक फादर जोसेफ विथयथिल ने सावधानी से उनका मार्गदर्शन किया। 1914 में त्रिशूर के धर्माध्यक्ष की स्वीकृति से उन्होंने पवित्र परिवार धर्मसंघ (CHF) की स्थापना की, जो परिवारों की देखभाल, लड़कियों की शिक्षा और गरीबों की सेवा के लिए समर्पित है।
8 जून 1926 को कुझिक्काट्टुस्सेरी में उनका देहांत हुआ। संत पापा संत जॉन पॉल द्वितीय ने 2000 में उन्हें धन्य घोषित किया और 13 अक्टूबर 2019 को संत जॉन हेनरी न्यूमन के साथ संत पापा फ्रांसिस ने उन्हें संत घोषित किया।
मरियम थ्रेसिया घरों में गईं, झगड़ते परिवारों में शांति लाईं और उनके साथ प्रार्थना की।
उन्होंने रोगियों और मरणासन्न लोगों की सेवा की, संक्रामक रोगियों की भी।
उन्होंने अपने असाधारण अनुभवों को कलीसिया की विवेचना को सौंपा।
उन्होंने अपने धर्मसंघ का नाम पवित्र परिवार रखा क्योंकि हर घर नाज़रेथ जैसा होना चाहिए।
अपने साथियों के साथ थ्रेसिया उन घरों में जातीं जहाँ बीमारी, गरीबी या झगड़ा था। वे सफाई करतीं, खाना बनातीं, सेवा करतीं, परिवार के साथ प्रार्थना करतीं और मेल-मिलाप के लिए प्रेरित करतीं। उनकी धैर्यपूर्ण उपस्थिति से अनेक परिवार फिर से जुड़ गए।
एक कभी धनी रहा परिवार गरीब हो गया; उन्होंने करुणा सीखी।
संक्रामक रोगियों सहित बीमारों की सेवा।
उनके आध्यात्मिक निर्देशक फ़ादर जोसेफ़ वितयत्तिल।
पवित्र परिवार धर्मसंघ की संस्थापिका (1914)।
प्रिय भाइयो और बहनो, पुत्तनचिरा की संत मरियम थ्रेसिया को परिवारों की प्रेरित कहा जाता है। उनके समय में बहुत से परिवार गरीबी, बीमारी, शराब और झगड़ों से टूटे हुए थे। वे प्रार्थना और व्यावहारिक प्रेम के साथ उन घरों में गईं।
थ्रेसिया का जन्म 1876 में एक ऐसे परिवार में हुआ जो कभी धनी था पर गरीब हो गया था। वे कठिनाई जानती थीं। कुछ साथियों के साथ उन्होंने घरों में जाना, बीमारों की, यहाँ तक कि उन संक्रामक रोगियों की भी जिनसे दूसरे बचते थे, सेवा करना और संकट में पड़े परिवारों की मदद करना शुरू किया। येसु ने कहा: तुमने मेरे इन छोटे से छोटे भाइयों में से किसी एक के लिए जो कुछ किया, वह मेरे लिए ही किया (मत्ती 25:40)।
उन्हें बड़ी आध्यात्मिक कृपाएँ मिलीं और वे परीक्षा के लंबे समय से भी गुज़रीं। इन सबमें वे अपने आध्यात्मिक निर्देशक फ़ादर जोसेफ़ वितयत्तिल और अपने धर्माध्यक्ष के प्रति आज्ञाकारी रहीं। 1914 में उन्होंने परिवारों की सेवा, लड़कियों की शिक्षा और गरीबों की देखभाल के लिए पवित्र परिवार धर्मसंघ की स्थापना की।
आज परिवार नए तूफ़ानों का सामना कर रहे हैं: पलायन, कर्ज़, नशे की लत, स्क्रीन, टूटते विवाह। मरियम थ्रेसिया हमें सिखाती हैं कि उन परिवारों के पास चुगली और निंदा के साथ नहीं, बल्कि प्रार्थना और सहायता के साथ जाएँ। आइए, अपनी पल्ली के संघर्षरत परिवारों के लिए प्रार्थना करें, और अपने घरों के लिए उनकी मध्यस्थता माँगें।
हमारा न्याय इस पर होगा कि हमने छोटे से छोटे के साथ कैसा व्यवहार किया (मत्ती 25:31–46)।
मैं बीमार था और तुम मुझसे मिलने आए।
येसु ने कोढ़ी को छुआ (मारकुस 1:40–42)।
मरियम थ्रेसिया ने संक्रामक रोगियों की सेवा की।
प्रिय मित्रो, संत मरियम थ्रेसिया के लिए वचन मत्ती के न्याय के दृश्य से है: तुमने मेरे इन छोटे से छोटे भाइयों और बहनों में से किसी एक के लिए जो कुछ किया, वह मेरे लिए ही किया (मत्ती 25:40)। अंतिम दिन ख्रीस्त हमारी उपाधियों या धन के बारे में नहीं, बल्कि भूखे, बीमार और परदेशी के बारे में पूछेंगे।
येसु स्वयं को गरीबों और दुःखियों में छिपाते हैं। मैं बीमार था और तुम मुझसे मिलने आए। मरियम थ्रेसिया ने इन शब्दों को शब्दशः लिया। वे उन घरों में गईं जहाँ दूसरे नहीं जाते थे, मरणासन्न लोगों की सेवा की, बीमारों को नहलाया, और निराश परिवारों को सांत्वना दी।
जब एक कोढ़ी येसु के पास आया, येसु ने हाथ बढ़ाकर उसे छुआ (मारकुस 1:41)। कोढ़ी अछूत माने जाते थे, पर येसु ने छुआ। जब दूसरे दूर रहते थे, मरियम थ्रेसिया ने संक्रामक रोगियों की सेवा की। प्रेम घायलों को छूने से नहीं डरता।
आज हमारी पल्ली में छोटे से छोटे कौन हैं? घर में अकेला पड़ा बीमार, कर्ज़ में डूबता परिवार, शराब का आदी व्यक्ति और उसकी पत्नी और बच्चे, घर से दूर प्रवासी मज़दूर। आइए, उन्हें अनदेखा करके आगे न बढ़ें। जब हम उनकी सेवा करते हैं, हम ख्रीस्त की सेवा करते हैं।
नाज़रेथ में प्रार्थना, परिश्रम और प्रेम।
क्षमा, मीठी वाणी, सहायता माँगना।
शराब और ड्रग्स घर उजाड़ते हैं; जल्दी सहायता लीजिए।
बच्चे घर में शांति ला सकते हैं।
प्रिय परिवारो, संत मरियम थ्रेसिया ने अपने धर्मसंघ को पवित्र परिवार का नाम दिया, क्योंकि उनका विश्वास था कि हर परिवार नाज़रेथ से सीख सकता है: येसु, मरियम और यूसुफ़ साथ प्रार्थना करते थे, परिश्रम करते थे, और एक-दूसरे से प्रेम करते थे।
हर परिवार में घाव होते हैं: झगड़े, कठोर शब्द, पैसों की समस्याएँ, पुरानी नाराज़गियाँ। मरियम थ्रेसिया ऐसे घरों में जाती थीं और प्रार्थना, धैर्य और व्यावहारिक सहायता से शांति लाती थीं। अपने घर में छोटी बातों से शुरुआत कीजिए: मीठा बोलिए, जल्दी क्षमा माँगिए, हर शाम साथ प्रार्थना कीजिए।
आज परिवारों का एक बड़ा शत्रु नशे की लत है: शराब, ड्रग्स, जुआ, यहाँ तक कि फ़ोन भी। यदि आपके परिवार में कोई संघर्ष कर रहा है, तो शर्म से उसे छिपाइए मत। जल्दी सहायता लीजिए: पल्ली से, किसी परामर्शदाता से, किसी नशा-मुक्ति केंद्र से। प्रेम कभी-कभी दृढ़ कदम की माँग करता है।
युवाओ, आप घर में शांति स्थापित करने वाले बन सकते हैं। जब आपके माता-पिता थके या तनाव में हों, तो बिना कहे मदद कीजिए, झगड़े को मत बढ़ाइए, और उनके लिए प्रार्थना कीजिए। संत मरियम थ्रेसिया से माँगिए कि वे आपके घर को एक पवित्र परिवार बनाएँ।
प्रभु ईश्वर, तूने संत मरियम थ्रेसिया को परिवारों और गरीबों के प्रति महान प्रेम दिया। उनकी प्रार्थनाओं से हमारे घरों को शांति से आशीर्वाद दे, टूटे परिवारों को चंगा कर, और हमें रोगियों और अकेले लोगों का सेवक बना। आमेन।