तूर के संत मार्टिन

सैनिक, मठवासी और तूर के धर्माध्यक्ष · पर्व: 11 नवंबर

तूर के संत मार्टिन
El Greco, St Martin and the Beggar, oil on canvas, 1597–1599, National Gallery of Art, Washington. The young soldier cuts his cloak in two for the poor man. Public domain (CC0), via Wikimedia Commons.
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ईश-वचन

📖 मत्ती 25:36

जीवन

मार्टिन का जन्म लगभग 316 में आज के हंगरी में एक रोमी सेना-अधिकारी के घर हुआ। बचपन में ही वे मसीह की ओर आकर्षित हुए, पर पंद्रह वर्ष की आयु में सेना में भर्ती किए गए। उन्हें व्यक्तिगत रूप से जाननेवाले मित्र सुल्पीसियुस सेवेरुस ने उनकी जीवनी लिखी।

कड़ाके की ठंड के एक दिन आमिएं नगर के द्वार पर उन्होंने अपना सैनिक लबादा दो भागों में काटकर आधा एक भिखारी को दे दिया। सुल्पीसियुस बताते हैं कि उसी रात उन्होंने स्वप्न में मसीह को वही आधा लबादा पहने देखा। शीघ्र ही उन्होंने बपतिस्मा लिया, फिर सेना छोड़कर पोआतिए के संत हिलरी के शिष्य बने और लगभग 361 में लिगूजे में एक मठ स्थापित किया।

371 में तूर के लोगों ने उन्हें धर्माध्यक्ष बनाया। वे नगर के बाहर मठवासी की तरह रहे, गाँवों में सुसमाचार सुनाया और गरीबों तथा कैदियों की देखभाल की। 8 नवंबर 397 को उनकी मृत्यु हुई और 11 नवंबर को उन्हें दफ़नाया गया।

शिक्षाएँ

जो है उसे बाँटो

उन्होंने उसी क्षण जो दे सकते थे, दिया; मसीह ने उसे अपने को दिया हुआ माना।

गरीब में मसीह

सबसे छोटे के लिए किया गया काम मसीह के लिए किया गया काम है।

नम्र अधिकार

धर्माध्यक्ष बनकर भी वे मठवासी की सादगी में रहे।

कथाएँ

बाँटा हुआ लबादा (परंपरा)

आमिएं के द्वार पर ठिठुरते भिखारी के साथ लबादा बाँटा और रात को मसीह को उसे पहने देखा।

हंसों ने भेद खोला (किंवदंती)

एक बाद की किंवदंती कहती है कि धर्माध्यक्ष बनने से बचने के लिए वे हंसों के बाड़े में छिपे, पर हंसों के शोर ने उन्हें पकड़वा दिया।

संत के वचन

हे प्रभु, यदि तेरी प्रजा को अब भी मेरी आवश्यकता है, तो मैं परिश्रम से इनकार नहीं करता; तेरी इच्छा पूरी हो।
मृत्युशय्या पर संत मार्टिन, सुल्पीसियुस सेवेरुस के अनुसार, सार

प्रवचन

1. आधा लबादा

मार्टिन ने उस क्षण जो दे सकते थे, दिया। उदारता भरपूरी की प्रतीक्षा नहीं करती।

2. तुमने मेरे लिए किया

मैं नंगा था और तुमने मुझे कपड़े पहनाए (मत्ती 25:36)।

3. मसीह का सैनिक

एक सेना छोड़कर दूसरी की सेवा की: सादगी से जीनेवाले मठवासी और धर्माध्यक्ष।

प्रिय भाइयो और बहनो, कड़ाके की ठंड में आमिएं के द्वार पर एक युवा रोमी सैनिक ने एक ठिठुरते भिखारी को देखा। उसके पास पैसे नहीं थे, केवल सैनिक लबादा था। उसने तलवार से उसे दो भागों में काटकर आधा दे दिया। उस रात उसने स्वप्न में मसीह को वही आधा लबादा पहने देखा।

येसु ने कहा था: मैं नंगा था और तुमने मुझे कपड़े पहनाए (मत्ती 25:36)। मार्टिन ने पूरा लबादा नहीं दिया; जो दे सकते थे दिया, और मसीह ने उसे अपने को दिया माना।

बाद में मठवासी और धर्माध्यक्ष बनकर भी वे सादगी से रहे और स्वयं गरीबों तथा कैदियों के पास गए। इस सप्ताह किसी ज़रूरतमंद को एक वस्त्र, एक भोजन, एक घंटे का साथ दें, और याद रखें कि हम वास्तव में किसे पहना रहे हैं। आमेन।

प्रार्थना

हे प्रभु ईश्वर, संत मार्टिन ने अपने जीवन और मृत्यु से तेरी महिमा की। हमारे हृदयों में अपनी कृपा के चमत्कार नवीकृत कर, ताकि न जीवन न मृत्यु हमें तेरे प्रेम से अलग कर सके। आमेन।